आर्मेनिया साम्राज्य
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आर्मेनिया साम्राज्य , जिसे 'ग्रेटर आर्मेनिया' भी कहा जाता है, प्राचीन पूर्वी एशिया में एक महत्वपूर्ण राज्य था, जो 331 ईसा पूर्व से 428 ईस्वी तक अस्तित्व में था। इस साम्राज्य का इतिहास तीन प्रमुख राजवंशों द्वारा शासित किया गया था: ओरोंटिड (331 ईसा पूर्व - 200 ईसा पूर्व), आर्टाक्सियाड (189 ईसा पूर्व - 12 ईस्वी), और आर्सासिड (52 - 428 ईस्वी)। आर्मेनिया साम्राज्य का उदय प्राचीन ईरान के आचेमेनी साम्राज्य की उपाधी, 'आर्मेनिया' से हुआ था, जो बाद में आलेक्जेंडर महान के विजय के बाद एक स्वतंत्र राज्य में रूपांतरित हो गया।[1]
आर्मेनिया साम्राज्य Հայք Hayk | |||||||||||
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331 ईसा पूर्व–428 ईस्वी | |||||||||||
तिग्रान महान के सिक्के पर दिखाए गए आर्मेनियाई ताज | |||||||||||
Status | साम्राज्य, राजा की शासन व्यवस्था | ||||||||||
राजधानी | आर्मवीर (331–210 ईसा पूर्व) यर्वंदशात (210–176 ईसा पूर्व) आर्टक्साटा (176–77 ईसा पूर्व; 69–120 ईस्वी) तिग्रानोसर्ता (77 ईसा पूर्व–69 ईस्वी) वाघारशपात (120–330) दविन (336–428) | ||||||||||
प्रचलित भाषा(एँ) | आर्मेनियाई, ग्रीक, अरेमीयाई, ईरानी भाषाएं (पार्थियाई और मध्य फारसी) | ||||||||||
धर्म | जोरास्ट्रियन धर्म (तकरीबन 301 ईस्वी तक) ईसाई धर्म (301 ईस्वी के बाद) | ||||||||||
सरकार | राजशाही | ||||||||||
• 331–317 ईसा पूर्व | ओरोंटेस III | ||||||||||
• 189–160 ईसा पूर्व | आर्टाक्सियास I | ||||||||||
• 95–55 ईसा पूर्व | तिग्रान महान | ||||||||||
• 55–34 ईसा पूर्व | आर्टवासदेस II | ||||||||||
• 52–58, 62–88 | तिरिदातेस I | ||||||||||
• 298–330 | तिरिदातेस III | ||||||||||
• 389–414 | व्रामशपुह | ||||||||||
• 422–428 | आर्टाक्सियास IV | ||||||||||
ऐतिहासिक युग | प्राचीन काल, मध्यकाल | ||||||||||
• आर्मेनिया का उपराज्य का गठन | लगभग 533 ईसा पूर्व | ||||||||||
• ओरोंटेस III का शासन शुरू | 331 ईसा पूर्व | ||||||||||
• रांडेआ की संधि | 63 ईस्वी | ||||||||||
• आर्मेनिया का ईसाईकरण | 301 ईस्वी | ||||||||||
• आर्मेनिया का विभाजन | 387 ईस्वी | ||||||||||
• आर्सासिड राजवंश के अंतिम शासक का अपदस्थ होना | 428 ईस्वी | ||||||||||
जनसंख्या | |||||||||||
• 70 ईसा पूर्व | 10,000,000 | ||||||||||
• 300 ईस्वी | 4,000,000 | ||||||||||
मुद्रा | तालेंट (माप) | ||||||||||
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इस साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध काल तिग्रान द ग्रेट के शासनकाल के दौरान था (83-69 ईसा पूर्व), जब आर्मेनिया साम्राज्य ने विशाल विस्तार किया और एक छोटे से साम्राज्य से बढ़कर एक क्षेत्रीय साम्राज्य में बदल गया, जिसने सीरिया, ईरान, तुर्की और काकेशस क्षेत्र के कई हिस्सों को समाहित किया। आर्मेनिया साम्राज्य ने अपना स्वर्णिम युग उस समय देखा जब तिग्रान ने अपने साम्राज्य का विस्तार किया, और उसे रोम साम्राज्य के समकक्ष एक शक्तिशाली राज्य बना दिया।
साम्राज्य ने 301 ईस्वी में ईसाई धर्म को राज्य धर्म के रूप में स्वीकार किया, जिससे आर्मेनिया दुनिया का पहला ईसाई राज्य बन गया। यह घटना आर्मेनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। आर्मेनिया का विभाजन 387 ईस्वी में हुआ, जब इसे बीजान्टिन आर्मेनिया और सासानी आर्मेनिया में बांट दिया गया। इसके बाद 428 ईस्वी में आर्मेनिया साम्राज्य का अंतिम शासक आर्सासिड वंश के द्वारा हटा दिया गया, और आर्मेनिया की स्वतंत्रता समाप्त हो गई।[2]
आर्मेनिया साम्राज्य का महत्व केवल सैन्य विजय और क्षेत्रीय विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने अपनी सांस्कृतिक धरोहर, कला, साहित्य और धर्म में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह साम्राज्य प्राचीन दुनिया के महत्वपूर्ण राजनीतिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक केंद्रों में से एक था।
इतिहास
संपादित करेंउद्गम
संपादित करें9वीं सदी ईसा पूर्व से पहले, आर्मेनियाई उच्च भूमि क्षेत्र में प्रोटो-आर्मेनियाई और अन्य जनजातियाँ निवास करती थीं, जो अभी तक एक एकीकृत राज्य या राष्ट्र नहीं थीं। आर्मेनियाई उच्चभूमि पर पहला राज्य जो प्रभावी था वह था उरार्टु साम्राज्य, जिसे वान साम्राज्य या अरारत साम्राज्य भी कहा जाता था। यह साम्राज्य अश्शूर के साथ क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा करता था।
इस साम्राज्य को ईरानी आक्रमणकारियों ने, विशेष रूप से मीडियाई साम्राज्य और बाद में आचेमेनी साम्राज्य के द्वारा नष्ट कर दिया था। इसके बाद उरार्टु साम्राज्य का क्षेत्र पुनर्गठित कर आर्मेनिया नामक उपराज्य में बदल दिया गया, जो आचेमेनी साम्राज्य का हिस्सा बना।[3]
ओरोंटिड राजवंश
संपादित करेंओरोंटिड राजवंश के तहत, आर्मेनिया का उपराज्य स्वतंत्र राज्य में परिवर्तित हुआ। 321 ईसा पूर्व में ओरोंटेस III ने आर्मेनिया को एक स्वतंत्र राज्य बना लिया। बाद में, इस राज्य का शासन आर्टाक्सियास I द्वारा 189 ईसा पूर्व में संभाला गया। आर्टाक्सियास I ने आर्मेनियाई उच्चभूमि को एकजुट किया और नई राजधानी आर्टक्साटा की स्थापना की।
आर्टाक्सियाड राजवंश
संपादित करेंआर्टाक्सियाड राजवंश के तहत आर्मेनिया साम्राज्य ने विस्तार किया। तिग्रान महान (टीग्रान II) के शासनकाल में (83-69 ईसा पूर्व), आर्मेनिया साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ, जब उसने सीरिया और अन्य क्षेत्रों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।[4]
रोमीय शासन
संपादित करेंआर्मेनिया को 66 ईसा पूर्व में रोम साम्राज्य का एक ग्राहक राज्य बना दिया गया। 301 ईस्वी में तिरिदातेस तृतीया ने आर्मेनिया में ईसाई धर्म को राज्य धर्म घोषित किया।
संदर्भ
संपादित करें- ↑ "Armenia - Ancient, Soviet, Genocide | Britannica". www.britannica.com (अंग्रेज़ी में). 2025-01-12. अभिगमन तिथि 2025-01-20.
- ↑ Chahin, M. (2001). The Kingdom of Armenia: A History (अंग्रेज़ी में). Psychology Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-7007-1452-0.
- ↑ "The Rise and Fall of the Kingdom of Cilician Armenia | AGBU". agbu.org. अभिगमन तिथि 2025-01-20.
- ↑ "Armenia country profile". BBC News (अंग्रेज़ी में). 2012-03-16. अभिगमन तिथि 2025-01-20.